गढ़वाल का अधिकांश भाग पवित्र भू-दृश्यों एवं प्रतिवेशों से परिपूर्ण है। उनकी पवित्रता देवताओं/पौराणिक व्यक्ति तत्वों, साधुओं एवं पौराणिक एतिहासिक घटनाओं से सम्बद्ध है। इन भू-दृश्यों के कुछ उदाहरण निम्न प्रलेख में दर्शाये गये हैं।
गंगोत्री उस पौराणिक स्थल से सम्बद्ध है जहाँ से पवित्र गंगा पृथ्वी पर अवतरित हई।
जौनसार बाबर क्षेत्र में लखमण्डल नामक स्थान के बारे में यह विश्वास है कि यही वह स्थल है जहाँ दुर्योधन ने पान्डवों को लाख से बने मकान में जला कर मारने का प्रयास किया था।
अगस्त्य, कपिल, पाराशर, दत्तात्रेय एवं विश्वामित्र नामक साधू अगस्त मुनि, श्रीनगर, पार-कान्डी, देवलगढ एवं रुद्रप्रयाग नगरों से सम्बद्ध हैं।
सिखों के गुरू गोविन्द सिंह ने ऊपरी हिमालय में हेमकुण्ड नामक स्थल पर तपस्या की थी।
गढ़वाल के अनेकों स्थल जैसे [देवप्रयाग, लक्ष्मण झूला, ऋषिकेश, तपोवन, मुनि की रेती, कर्ण प्रयाग एवं पाण्डुकेश्वर पाण्डवों से सम्बद्ध हैं।
सम्पूर्ण विश्व में निवास करने वाले हिन्दुओं के लिए पूजनीय अनेकों मन्दिर गढ़वाल में स्थित हैं। इन मन्दिरों में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग एवं वाकेश्वर इत्यादि प्रमुख हैं।
विभिन्न देवी देवताओं के सैकडों मन्दिर पर्वतीय क्षेत्रों के समस्त भागों में स्थित पहाडियों के शिखरों पर स्थापित है। उदाहरणतः सरकण्डा देवी, तुंगनाथ रुद्रनाथ, किनकेउलेश्वर एवं अनसूय्या माता इत्यादि
पवित्र गंगा नदी गढ़वाल से उदगमित होती है तथा मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करने से पूर्व गढ़वाल में प्रवाहित होती है। गंगा एवं इसकी सहायक नदियों के तट पर अनेकों पवित्र नगर जैसे ऋषिकेश, देवप्रयाग, गौमुख, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं बद्रीनाथ स्थापित है।